प्रवित्ति
एक संत नदी में स्नान कर रहे थे, और एक बिच्छु उन्हें बार बार आकर डंक मार रहा था, संत उस बिच्छू को हर बार हाथ से हटा देते , उनके शिष्यों ने पूछा बिच्छू को आप ने मार किउ नही दिया, संत ने उत्तर दिया जब बिच्छू ने अपनी प्रवित्ति नही बदली तो मैं किउ बदलू। प्राकृति में सभी प्राणी अपने मूल प्रकृति के अनुरूप ही कार्य करते है। गीता में भगवान कृष्ण कहते है, जब तक मनुष्य मेरी भक्ति नही करता तब तक वह प्राकृति के तीन गुणों द्वारा वशीभूत होकर उसके अनुरूप कार्य करता है। अतः भक्ति ही एक मार्ग है जिससे हम अपने गुण और स्वभाव में बदलाव ला सकते है।