सफलता के जुनून मे हम इतने अंधे हो चले
भूल गए जिन रास्तो ने हमे मंजिले तक पहुचाई
पता रहता की हर रोज सिखाती है ये रास्ते तो ऐसी जुर्रत ना करता
पर क्या करता कामयाबी के उमंग मे अंधा हो चला था।
जो रास्ते हमे मंजिले तक लेकर चले हमे उन्हें ध्वस्त कभी नही करनी चाहिए। अक्सर ये रास्ते नित्य नए आयाम गढ़ते है हमारे जीवन मे। ये रास्ते हर रोज हमे कुछ न कुछ सिखाती है। यह हमारे गुजरे हुए कल की याद दिलाती है। यह हमारे वजूद की याद दिलाती है।
अक्सर जब हम कामयाब होते है। तब प्रनसा हमे दीमक की तरह खाने लगती है।हम उस कामयाबी के प्रसंसा मे खो कर अपने लक्ष्य से भटक जाते है। पर इन सब से परे हमे उस रास्ते और इन्सान को कभी नही भूलना चाहिए। हमे उस इंसान की जरूरत तब भी पड सकती है जब हब अपने कामयाबी के बुलंदियों तक पहुच गए हो।
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