कीर्ति

                     कीर्ति
कीर्ति वही स्थायी होती है जो सत्कार्यो द्वारा अर्जित की जाए- गरुड़पुराण
वर्तमान में मनुष्य कामयाबी के लिए बहुत सारे अवैध एवं आसान तरीके अपना रहे है, मीडिया के इस युग मे व्यक्ति धन बल से आसानी से ख्याति पा सकता है,पर प्रश्न यह खड़ा होता है कि क्या वह सफलता आजीवन बनी रहेगी। शीर्ष पर पहुचना उतना आसान नही है परंतु शीर्ष पर टिके रहना एक चुनौती होती है, उसके लिए हमे अभ्यास, निरंतरता, अपने कार्य क्षेत्र में दक्षता और हुनर की जरूरत होती है।
                      सफलता और कीर्ति दोनों अलग अलग आयाम है, एक सफल व्यक्ति जरूरी नही कीर्तिवान हो परंतु हर कीर्तिवान व्यक्ति सफल आवश्य होता है।
                   एक खजूर का पेड़ बहुत उच्चा होता है सभी पेड़ो से भी उच्चा पर उसके फल कोई नही खाते। व्यक्ति अवैध तरीके अपना कर धन अर्जित कर उच्चाई प्राप्त कर सकता पर वह रास्ते उसे कीर्ति नही प्राप्त करा सकती।
                     स्थायी कीर्ति के लिए सबसे पहली कड़ी  सत्कर्म है जो  आज विलुप्त होता जा रहा है, जो धनाढ्य लोग है वह धन बल से अपना प्रचार प्रसार कर लेते है पर जो मध्यम वर्ग से आते है वे इस सफलता से वंचित रह जाते है।
               परंतु धन कभी भी सफलता का मापदंड नही हो सकता। वर्तमान में सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, ट्वीटर, यूट्यूब इत्यादि पर  व्यक्ति अपना हुनर प्रदर्शित कर सफलता के आयाम गढ़ सकते है।
           प्रश्न यह उठता है कि हम हुनर कैसे विकसित करें। इसके लिए हमे अपने कार्य क्षेत्र के विषय मे जिज्ञासा जागृत करनी होगी और अपने आप से प्रश्न पूछने की आदत डालनी होगी। इससे हमारे ज्ञान बढ़ेंगे जो हमारे हुनर को और दृढ़ करेंगे। 

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