अवसाद
प्रतिस्पर्धा के इस युग मे आज शिक्षित और अनुभवी लोग अवसाद से ग्रसित होते जा रहे है, और कुछ तो आत्म हत्या तक कर लिए है।
आखिर अवसाद है क्या? यह एक मनोवृति है जो हमारे विचार से प्रकट होती है। हमारे विचार बहुत हद तक हमारे चित की उपज है, और अगर हमे अपने विचार को शुद्ध करना है तो पहले चित्त को शुद्व करना होगा। चित्त में विकार के कारण हमारे विचार अशुद्ध होते है जो कि अवसाद का प्रमुख कारण है।
जब हम अवसाद से ग्रसित होते है तो हमारी शरीर की ऊर्जा सबसे निम्न अस्तर पर होती है, जिसके कारण हमारे अंदर नकारात्मक विचार उत्पन्न होते है, हम अपने आप को हारा हुआ और अलग थलग महसूस करते है। जब हम अवसाद में रहते है तो हमारे अंदर तामसिक गुणों का प्रवाह अधिक रहता है।
क्या आप सब जानते है रावण से युद्व लड़ते वक़्त श्री राम भी विषाद में चले गए थे, वे अपने आप को हारा हुआ मान बैठे थे, तब युद्धभूमि में गरुड़ आये उनको स्पर्श किया और वह पुनः अपने वास्तविक स्वभाव को प्राप्त हुए। कुरुक्षेत्र में अर्जुन अपनो को युद्ध मे देख कर विषाद से ग्रसित हो गए थे, गीता का पहला अध्याय अर्जुन विषाद योग से जाना जाता है। भगवान राम विष्णु के अवतार थे और अर्जुन पूर्व जन्म में ऋषि थे जो कि इंद्र के अंश से उत्पन्न हुए थे।
जब ऐसे लोग अपने जीवन मे विषाद से ग्रसित हुए, तो हम और आप साधारण मनुष्य है, फिर किउ अपने आप को हारा महशुस करते हो।
विषाद से निदान पाने के लिए दवा नही आत्मबल और मनोबल की जरूरत है, अगर आप विषाद से ग्रसित है तो किसी योग्य संत के पास जाए, वो आपको ज्ञान देंगे जो आपके मनोबल को बढ़ाएगा और उनके संगति से आपकी नकरात्मक ऊर्जा खत्म हो जाएगी।
जब ऐसे लोग अपने जीवन मे विषाद से ग्रसित हुए, तो हम और आप साधारण मनुष्य है, फिर किउ अपने आप को हारा महशुस करते हो।
विषाद से निदान पाने के लिए दवा नही आत्मबल और मनोबल की जरूरत है, अगर आप विषाद से ग्रसित है तो किसी योग्य संत के पास जाए, वो आपको ज्ञान देंगे जो आपके मनोबल को बढ़ाएगा और उनके संगति से आपकी नकरात्मक ऊर्जा खत्म हो जाएगी।
संगति बहुत बड़ा भूमिका निभाती है मनुष्य के विचारों में, जब हम समूह में रहते है तो प्रत्येक व्यक्ति के विचारों की तरंग वातावरण में प्रवाहित होता रहता है जो हमारे विचारों को प्रभावित करता है, अतः सत्संग करे, अछि किताबे पढ़े।
प्राणायाम करने से हमारी इंद्रिया वश में रहती है, अतः रोज प्राणायाम करे, वेद कहता है जल में सभी औषधियां पाई जाती है, अतः शुद्ध जल पिये, अछि संगति करे, सत्संग करे ये सब कार्य आपके मनोवृति को बदल देगा और आप अपने आप को आशान्वित महशुस करने लगेंगे।
स्मरण रखे शास्त्र कहता है आत्महत्या एक जघन्य पाप है और इसका कोई निदान नही होता। जिंदगी में हार जीत होती रहती है, उत्तर चढ़ाव आते रहते है,इनसे हारने के वजाए लड़े, सत्संग करे, भजन करे, संकीर्तन करे,अछे संगीत सुने, यकीन मानिए आप अवसाद से मुक्त हो जाएंगे।
प्राणायाम करने से हमारी इंद्रिया वश में रहती है, अतः रोज प्राणायाम करे, वेद कहता है जल में सभी औषधियां पाई जाती है, अतः शुद्ध जल पिये, अछि संगति करे, सत्संग करे ये सब कार्य आपके मनोवृति को बदल देगा और आप अपने आप को आशान्वित महशुस करने लगेंगे।
स्मरण रखे शास्त्र कहता है आत्महत्या एक जघन्य पाप है और इसका कोई निदान नही होता। जिंदगी में हार जीत होती रहती है, उत्तर चढ़ाव आते रहते है,इनसे हारने के वजाए लड़े, सत्संग करे, भजन करे, संकीर्तन करे,अछे संगीत सुने, यकीन मानिए आप अवसाद से मुक्त हो जाएंगे।
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