उन उद्यमियों के लिए जो घाटे में चल रहे है
जब इन्द्र कर्ण से कवच और कुंडल ले लिए तो कर्ण ने उन्हें जानते हो क्या कहा?
कर्ण ने इंद्र से कहा है देवराज आपका बहुत बहुत धन्यवाद जो आपने मुझे सामान्य मनुष्यो के श्रेणी में ला दिए ।कवच और कुंडल के साथ मैं सामान्य मनुष्यो से भिन्न था। बदले में इंद्र ने कर्ण को दिव्य अस्त्र प्रदान किये।
अतः कभी जिंदगी से निराश मत होइए। कर्ण ने तो आत्महत्या नही की। अपना पुरुषार्थ करना कभी नही छोड़ना चाहिए। स्मरण रखिये आपके पास अनुभव है कमी बस आत्मबल की है, आपकी ऊर्जा का स्तर निम्न स्तर पर पहुच गया है, और उसके लिए दवा की नही एक अछे संत की जरूरत है।
प्राचीन काल मे जब राजा लोग युद्ध मे पराजित होते थे तो वन की तरफ रुख करते थे, वहां वे लोग ऋषियों से मिलकर कारण जानने की कोशिश करते और उनसे उचित मार्ग की बताने के लिए कहते। ऋषि लोग उन्हें जीवन के यथार्थ का बोध कराते थे।
ये सब बात एक मनोचिकित्सक नही बता सकता किउ की उसे ये जानकारी ही नही है। उसे सिर्फ औषदि का ज्ञान है जो कि आपको जरूरत नही।
अतः आशावादी बने सत्संग करे। और अपने उधम में निरत लगे रहे , सफलता एक दिन जरूर मिलेगी
अतः आशावादी बने सत्संग करे। और अपने उधम में निरत लगे रहे , सफलता एक दिन जरूर मिलेगी
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